सोमवार, 23 जून 2014

"जो हमारा नहीं है और जो हमारा कभी हो भी नहीं सकता ! हम इंसान कभी कभी उसके ऊपर बहुत आसानी से हक़ जमा लेते हैं, और फिर खोने के डर से पागलों जैसे हरकत करते है ।।"

शुक्रवार, 6 जून 2014

एकबार सोचिएगा हमारी सारी देशभक्ति मूलक नीतियाँ अगर व्यक्ति देख कर बदल जाती है तो इतना जान लीजिये फिर हम व्यक्तिवादी है न की राष्ट्रवादी ॥
हमारे मन में किसी व्यक्ति के लिए जो ओहदा, सम्मान और प्यार हैं हमेशा सामने वाले के मन में भी हमारे लिए वोही ओहदा, सम्मान और प्यार हो यह ज़रूरी नहीं है । हर एक इन्सान की संवेदनाएं, भावनाएं और अनुभव अलग अलग होती है इसीलिए एहसास भी अलग अलग होता है । फिर दुःख किस बात का हमें बस अपने हक़ का कार्य करना है और एकदिन इस दुनिया से चले जाना है ।।

गुरुवार, 29 मई 2014

कोई व्यक्ति राष्ट्र से बढ़ कर नहीं हो सकता।
हर एक रिश्ते में मनमुटाव और वाद विवाद होता है । कई या हर चीजों पर एक दूजे का मत और सोच अलग हो सकता है । लड़ाई भी हो सकती है, आखिर हम सब इंसान हैं । इसका अर्थ यह नहीं होता है कि रिश्ते में प्यार नहीं बचा या फिर रिश्ता टूट गया !

मंगलवार, 20 मई 2014

इंसान जब बहुत खुश होता है तब भी कुछ नहीं बोल पाता और जब हद से ज्यादा दुखी होता है तब भी कुछ नहीं बोल पाता ।। दोनों परिस्थिति में इंसान बस मूक दर्शक मात्र ही बन कर रह जाता है ।।

रविवार, 18 मई 2014

अगर आप जीत कर भी असभ्य है तो तो हार कर भी मुस्कुराने वाला हार कर भी न जाने क्या क्या जीत लेता है ....... विजेता बनिए विनम्र रहिये जिंदगी में न जाने कितनी कामयाबियां मिलेंगी |