शनिवार, 8 नवंबर 2014

हर एक छोटे-बड़े काम के लिए फ़ैमिली का सपोर्ट मिलना बहुत ज़रूरी होता है। हर एक बच्चे को अपने फ़ैमिली से ही पहली आस होती है। अगर बच्चा सही है और सही काम कर रहा हो तो उन्हें हमेशा उत्साहित करना चाहिए। वक़्त के साथ साथ परिवारों को अपनी परंपरागत चली आ रही कुछ रुढ़िवादी सोच को ज़रूर बदलना चाहिए, ताकि उनके बच्चे आगे बढ़ें, अपनी ख़्वाहिशों को पूरी करें और वो अपने जीवन को जियें ताकि हजारों में एक बनके उभरें ।।
आज आधुनिकता की दौड़ में फंसे संवेदनहीन परिवारों में दादा-दादी, नाना-नानी या तो आप्रासंगिक हो गये हैं, या फिर वृद्धाश्रमों में भेज दिये गये हैं। अगर कुछ सौभाग्यशाली बच गये हैं तो अपने घरों के एक कोने में सिमट कर रह गये हैं। क्योंकि उन्हें अपनी इज्ज़त और सर के ऊपर छत की फ़िक्र है। कहीं जीवन के इस अंतिम दौड़ में यह सहारा भी उनसे न छीन जाए ।।
अगर हम दूसरे से अपेक्षा रखते हैं कि वो हमारी बातों का क़द्र करें और सुनें, तो पहले हमें दूसरों की बातों का क़द्र करना चाहिए और सुनना चाहिए और साथ ही ये कला सीखनी चाहिए ।। 

शनिवार, 16 अगस्त 2014

एक सामाजिक कार्यकर्ता के लिए इंसानियत ज्यादा अहमियत रखती है, ना की किसी एक जाति या समुदाय को देख कर मदद करना !!

शुक्रवार, 8 अगस्त 2014

कुछ Ultra Modern लोग भगवान् को नहीं मानते हैं लेकिन Style से बात बात पर "Oh My God" ज़रूर कहते हैं ।।
अगर पहनावे से ही किसी इंसान की देशभक्ति जाग उठती तो हमारे देश के नेता लोग इतने चोर और निकम्मे न होते । खाकी को ख़ाक में और् खादी को खाद में मिला दिया है इन लोगो ने ।।
सच बोलने में या सुनने में कोई दिक्कत नहीं है बस हज़म करने में दिक्कत होती है ।