झूठ बोल कर हम
कुछ वक़्त के लिए दूसरे को धोखा दे सकते हैं, लेकिन ख़ुद को नहीं | किसी की सहानुभूति पाने के लिए भी हमें एक दायरे में रह कर
ही झूठ बोलना चाहिए, ताकि बाद में
माफ़ी मिल जाए | ना की सामने वाले
को बेवकूफ समझ कर कुछ भी अनाप-सनाप बकते रहें |
बुधवार, 16 अप्रैल 2014
बुधवार, 9 अप्रैल 2014
मंगलवार, 18 मार्च 2014
शुक्रवार, 7 मार्च 2014
बोझ
हम किसी के जीवन में
अनजाने ही बोझ बन जाते हैं | कभी कभी यह सामने वाले की महानता होती है कि वो हमारे
सम्मान केखातिर चुप रहते हैं, और जब हमें इस बातका एहसास होता है तब वहां से हमें
निकालजाना चाहिए और उसे शांति से जीने देना चाहिए |
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