रविवार, 5 जनवरी 2014

असंतुष्ट

प्यार को अगर हम दिमाग से सोचेंगे तो सही रूप में समझ नहीं पाएंगे | कहीं-न-कहीं हमें सबकुछ गलत नज़र आएगा और जहाँ प्यार से ज़्यादा दिमाग चलता है वहाँ सच्चा प्यार नहीं हो सकता | लेकिन आज के जमाने में दिमाग चलना भी ज़रूरी हैं क्योंकि परिवेश और सोच अब बहुत ज़्यादा भौतिकवादी हो गया है तो हमें कहीं आगे चल कर धोखा ना मिल जाए, इसका भी खयाल रखना पड़ता है | आज इन सारे कारणों के चलते ज़्यादातर लोग अपने रिश्ते को सही ढंग से जी ही नहीं पाते है और हमेशा अपने आप से और सामनेवाले से कहीं-न-कहीं असंतुष्ट रहते है |

गुरुवार, 26 दिसंबर 2013

मानसिक सहयोग

कभी-कभी बीमारी में डाक्टर और दवा से ज्यादा अपनों का अपनापन और मानसिक सहयोग ज्यादा ज़रूरी होता हैं |

यादें

जब हमारा कोई सगा या कोई अपना हमसे दूर चला जाता है तब जीवन भर के लिए उसकी अच्छी यादें हमेशा हमारे साथ रहती हैं और उसकी यही यादें हमारी जीने का सहारा बन जाती हैं |

समायोजन

जीवन कठिन है लेकिन अपनी तरफ से हम कितना समायोजन (Adjustment) कर रहे हैं , इस बात के ऊपर बहुत कुछ निर्भर करता है | जब हम समन्वय और समायोजन को जीवन में अपनाते हैं तो जीना बहुत हद तक आसान हो जाता है | जो कार्य सिर्फ हमें करना ही है क्यों न हम उसे हँस कर ही करें |

शुक्रवार, 20 दिसंबर 2013

दुनिया की हक़ीक़त --

जिसे ज़्यादा खाने को मिलता है , वही ज़्यादा भूखा रहता है इस दुनिया में |

शुक्रवार, 13 दिसंबर 2013

हम खुद क्या है ?

हम अपने लिए हमेशा ही ‘राम’ या ‘सीता’ तलाशते रहते हैं पर पहले यह सोचना ज़रूरी है कि हम खुद ‘सीता’ या ‘राम’ हैं या नहीं |

मंगलवार, 3 दिसंबर 2013

समझ

बहुत कठिन होता है किसी भी इंसान को उसी के ‘समझ’ से उसे ‘समझना’ |