इसे आधुनिक बाल
मज़दूरी ही कहेंगे जहाँ बच्चों के स्कूल बैग इतने भारी होते है कि मानो बच्चा स्कूल
नहीं मजदूरी करने जा रहा है। कहीं बच्चे बड़े बड़े बिल्डिंग के तले मज़दूरी करते हुए
दिख जायेगा तो कहीं किताबों और भविष्य की आमदानी के तले जूझते हुए।।
'अभिव्यक्ति की आज़ादी' की समझ अच्छे खासे
समझदारों को नहीं है ।।
सिगरेट के धुएं
में डूबा दी ये ज़िन्दगीऔर एकदिन ज़िन्दगी
ही धुँआ हो कर उड़ गयी ।।
शनिवार, 4 अप्रैल 2015
ज़माने में चलने
के लिए हर किसी को पॉजिटिव तो होना पड़ेगा। हर चीज में बुराई ढूंढने वाले लोग
दुनिया से जल्द ही कट जाते है और धीरे धीरे उनको कोई याद भी नहीं करता ।।